Showing posts with label Main Apne Ghar Mein Hi Ajnabi Ho Gaya Hoon. Show all posts
Showing posts with label Main Apne Ghar Mein Hi Ajnabi Ho Gaya Hoon. Show all posts

Jan 22, 2011

मैं अपने घर में ही अजनबी हो गया हूँ


मैं अपने घर में ही अजनबी हो गया हूँ आ कर
मुझे यहाँ देखकर मेरी रूह डर गई है
सहम के सब आरज़ुएँ कोनों में जा छुपी हैं
लवें बुझा दी हैं अपने चेहरों की, हसरतों ने
कि शौक़ पहचानता ही नहीं
मुरादें दहलीज़ ही पे सर रख के मर गई हैं
मैं किस वतन की तलाश में यूँ चला था घर से
कि अपने घर में भी अजनबी हो गया हूँ आ कर 
                                                        ----- गुलज़ार