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Jan 19, 2011

ठानी थी दिल में अब न मिलेंगे

ठानी थी दिल में अब न मिलेंगे किसी से हम
पर क्या करें कि हो गए नाचार जी से हम

हम से न बोलो तुम इसे कहते हैं क्या भला
इन्साफ कीजे पूछते हैं आप ही से हम

क्या गुल खिलेगा देखिये है फ़स्ल-ए-गुल तो दूर
और सू-ए-दश्त भागते हैं कुछ अभी से हम

क्या दिल को ले गया कोई बेगाना आशना
क्यों अपने जी को लगते हैं कुछ अजनबी से हम
                                                        ------- मोमिन खान मोमिन 

मार ही डाल मुझे

मार ही डाल मुझे चश्म-ए-अदा से पहले
अपनी मंज़िल को पहुँच जाऊं क़ज़ा से पहले

इक नज़र देख लूं आ जाओ क़ज़ा से पहले
तुमसे मिलने की तमन्ना है ख़ुदा से पहले

हश्र के रोज़ मैं पूछुंगा ख़ुदा से पहले
तू ने रोका नहीं क्यों मुझको ख़ता से पहले

ऐ मेरी मौत ठहर उनको ज़रा आने दे
ज़हर का जाम न दे मुझको दवा से पहले

हाथ पहुंचे भी न थे जुल्फ़ दोता तक 'मोमिन'
हथकड़ी डाल दी ज़ालिम ने ख़ता से पहले 
                                                   ---- मोमिन खान मोमिन

Jan 18, 2011

रोया करेंगे आप भी

रोया करेंगे आप भी पहरों इसी तरह
अटका कहीं जो आपका दिल भी मेरी तरह

ना ताब हिज्र में है ना आराम वस्ल में
कमबख्त दिल को चैन नहीं है किसी तरह

गर चुप रहे तो ग़म-ए-हिज्राँ से छूट जाएँ
कहते तो हैं वो भले की लेकिन बुरी तरह

ना जाए वां बने है ना बिन जाए चैन है
क्या कीजिये हमें तो है मुश्किल सभी तरह

लगती है गालियाँ भी तेरी मुझे क्या भली
कुर्बान तेरे, फिर मुझे कह ले इसी तरह

हूँ जां-ए-बलब बुतां-ए-सितमगर के हाथ से
क्या सब जहां में जीते हैं 'मोमिन' इसी तरह
                                                      ----- मोमिन खान मोमिन