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Jan 17, 2011

हाथ उठे हैं मगर लब पे दुआ कोई नहीं

हाथ उठे हैं मगर लब पे दुआ कोई नहीं
की इबादत भी वो जिस की जज़ा कोई नहीं

ये भी वक़्त आना था अब तो गोश हर आवाज़ है
और मेरे बर्बाद-ए-दिल में सदा कोई नहीं

आ के अब तस्लीम कर लें तू नहीं तो मैं सही
कौन मानेगा की हम में बेवफा कोई नहीं

वक़्त ने वो ख़ाक उडाई है के दिल के दश्त से
काफिले गुज़रे हैं फिर भी नक्श-ए-पा कोई नहीं

खुद को यूँ महसूर कर बैठा हूँ अपनी ज़ात में
मंजिलें चारों तरफ हैं रास्ता कोई नहीं

कैसे रास्तों से चले और किस जगह पहुंचे 'फ़राज़'
या हुजूम-ए-दोस्तां था साथ या कोई नहीं
                                                     - अहमद फ़राज़

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अहमद फ़राज़ (उर्दू : احمد فراز) पाकिस्तानी उर्दू शायर थे| उनका असली नाम सएद अहमद शाह (سید احمد شاہ) था. अहमद  फ़राज़ का देहांत २५ अगस्त २००८ को इस्लामाबाद में हुआ|
                                        

अब नए साल की मोहलत नहीं मिलने वाली

अब नए साल की मोहलत नहीं मिलने वाली
आ चुके अब तो शब्-ओ-रोज़ अज़ाबों वाले

अब तो सब दशना-ए-खंज़र की जुबां बोलते हैं
अब कहाँ लोग मोहब्बत के निभाने वाले

ज़िंदा रहने की तमन्ना हो तो हो जाते हैं
फाख्ताओं के भी किरदार उकाबों वाले

न मेरे ज़ख्म खिलने हैं न तेरा रंग-ए-हिना
मौसम आये ही नहीं अबकी गुलाबों वाले
                                              --- फ़राज़

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अहमद फ़राज़ (उर्दू : احمد فراز) पाकिस्तानी उर्दू शायर थे| उनका असली नाम सएद अहमद शाह (سید احمد شاہ) था. अहमद  फ़राज़ का देहांत २५ अगस्त २००८ को इस्लामाबाद में हुआ|

अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें

अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें
जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें ,

ढूँढ उजड़े हुए लोगों में वफ़ा के मोती
ये खजाने तुझे मुमकिन है खराबों में मिलें ,

तू खुदा है न मेरा इश्क फरिश्तों जैसा 
दोनों इंसान हैं तो क्यों इतने हिज़ाबों में मिलें ,

ग़म-ए-दुनिया भी ग़म-ए-यार में शामिल कर लो
नशा बढ़ता है शराबें जो शराबों में मिलें ,

आज हम दार पर खींचे गए जिन बातों पर
क्या अजब कल वो जमाने को नसीबों में मिले ,

अब न वो मैं हूँ न तू है ना वो माज़ी है 'फ़राज़'
जैसे दो शक्श तमन्ना के सराबों में मिलें

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अहमद फ़राज़ (उर्दू : احمد فراز) पाकिस्तानी उर्दू शायर थे| उनका असली नाम सएद अहमद शाह (سید احمد شاہ) था. अहमद  फ़राज़ का देहांत २५ अगस्त २००८ को इस्लामाबाद में हुआ|

आशिकी बे-दिली से मुश्किल है

आशिकी  बे-दिली से मुश्किल है
फिर मोहब्बत उसी से मुश्किल है ,

इश्क आगाज़ से ही मुश्किल है
सब्र करना अभी से मुश्किल है,

जिसको सब बे वफ़ा समझते हों
बेवफ़ाई उसी से मुश्किल है

एक दो दुसरे से सहल न जान
हर कोई हर किसी से मुश्किल है


तू बा-जिद है तो जा 'फ़राज़' मगर
वापसी उस गली से मुश्किल है |
                                    ----- अहमद फ़राज़

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अहमद फ़राज़ (उर्दू : احمد فراز) पाकिस्तानी उर्दू शायर थे| उनका असली नाम सएद अहमद शाह (سید احمد شاہ) था. अहमद  फ़राज़ का देहांत २५ अगस्त २००८ को इस्लामाबाद में हुआ|