यूँ तेरी रहगुज़र से दीवानावार गुज़रे
काँधे पे अपने रख के अपना मज़ार गुज़रे
बैठे रहे हैं रस्ते में दिल का खँडहर सजा के
शायद इसी तरफ से एक दिन बहार गुज़रे
बहती हुई ये नदिया घुलते हुए किनारे
कोई तो पार उतरे कोई तो पार गुज़रे
तूने भी हमको देखा हमने भी तुझको देखा
तू दिल ही हार गुज़रा हम जां हार गुज़रे |
--- मीना कुमारी 'नाज़'
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Jan 17, 2011
ये रात ये तन्हाई
ये रात ये तन्हाई
ये दिल के धड़कने की आवाज़
ये सन्नाटा
ये डूबते तारों की
खामोश ग़ज़ल ख्वानी
ये वक़्त की पलकों पर
सोती हुई वीरानी
जज़्बात-ए-मोहब्बत की
ये आखिरी अंगडाई
बजती हुई हर ज़ानिब
ये मौत की शहनाई
सब तुम को बुलाते हैं
पल भर को तुम आ जाओ
बंद होती मेरी आँखों में
मोहब्बत का
इक ख्वाब सजा जाओ
--- मीना कुमारी 'नाज़'
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मीना कुमारी
पूछते हो तो सुनो कैसे बसर होती है
पूछते हो तो सुनो कैसे बसर होती है
रात खैरात की सदके की सेहर होती है
सांस भरने को तो जीना नहीं कहते या रब
दिल ही दुखता है न अब आस्तीन तर होती है
जैसे जागी हुई आँखों में चुभें कांच के ख्वाब
रात इस तरह दीवानों की बसर होती है
ग़म ही दुश्मन है मेरा ग़म को ही दिल ढूँढता है
एक लम्हे की जुदाई भी अगर होती है
एक मरकज़ की तलाश एक भटकती खुशबू
कभी मंजिल कभी तम्हीद-ए-सफ़र होती है |
--- मीना कुमारी 'नाज़'
रात खैरात की सदके की सेहर होती है
सांस भरने को तो जीना नहीं कहते या रब
दिल ही दुखता है न अब आस्तीन तर होती है
जैसे जागी हुई आँखों में चुभें कांच के ख्वाब
रात इस तरह दीवानों की बसर होती है
ग़म ही दुश्मन है मेरा ग़म को ही दिल ढूँढता है
एक लम्हे की जुदाई भी अगर होती है
एक मरकज़ की तलाश एक भटकती खुशबू
कभी मंजिल कभी तम्हीद-ए-सफ़र होती है |
--- मीना कुमारी 'नाज़'
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मीना कुमारी
चाँद तनहा है आसमां तनहा
चाँद तनहा है आसमां तनहा
दिल मिला है कहाँ कहाँ तनहा
बुझ गयी आस छुप गया तारा
थरथराता रहा धुआं तनहा
जिंदगी क्या इसी को कहते हैं
जिस्म तनहा है और जां तनहा
हमसफ़र कोई गर मिले भी कहीं
दोनों चलते रहे तनहा तनहा
जलती बुझती सी रौशनी के परे
सिमटा सिमटा सा एक मकां तनहा
राह देखा करेगा सदियों तक
छोड़ जायेंगे ये जहां तनहा
--- मीना कुमारी 'नाज़'
दिल मिला है कहाँ कहाँ तनहा
बुझ गयी आस छुप गया तारा
थरथराता रहा धुआं तनहा
जिंदगी क्या इसी को कहते हैं
जिस्म तनहा है और जां तनहा
हमसफ़र कोई गर मिले भी कहीं
दोनों चलते रहे तनहा तनहा
जलती बुझती सी रौशनी के परे
सिमटा सिमटा सा एक मकां तनहा
राह देखा करेगा सदियों तक
छोड़ जायेंगे ये जहां तनहा
--- मीना कुमारी 'नाज़'
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मीना कुमारी
आगाज़ तो होता है अंजाम नहीं होता
आगाज़ तो होता है अंजाम नहीं होता
जब मेरी कहानी में वो नाम नहीं होता
जब ज़ुल्फ़ की कालिख़ में घुल जाए कोई राही
बदनाम सही लेकिन गुमनाम नहीं होता
हँस हँस के जवां दिल के हम क्यों न चुने टुकड़े
हर शख्स की किस्मत में ईनाम नहीं होता
बहते हुए आंसू ने आँखों से कहा थम कर
जो मय से पिघल जाए वो जाम नहीं होता
दिन डूबे हैं या डूबी बारात लिए कश्ती
साहिल पे मगर कोई कोहराम नहीं होता
--- मीना कुमारी 'नाज़'
*******
महजबीं बानो जिनको भारतीय फिल्म जगत में ट्रेजेडी क़ुईन मीना कुमारी के नाम से जाना जाता है | वो जितनी अच्छी अदाकारा थीं उतनी ही अच्छी शायर भी थीं |
जब मेरी कहानी में वो नाम नहीं होता
जब ज़ुल्फ़ की कालिख़ में घुल जाए कोई राही
बदनाम सही लेकिन गुमनाम नहीं होता
हँस हँस के जवां दिल के हम क्यों न चुने टुकड़े
हर शख्स की किस्मत में ईनाम नहीं होता
बहते हुए आंसू ने आँखों से कहा थम कर
जो मय से पिघल जाए वो जाम नहीं होता
दिन डूबे हैं या डूबी बारात लिए कश्ती
साहिल पे मगर कोई कोहराम नहीं होता
--- मीना कुमारी 'नाज़'
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महजबीं बानो जिनको भारतीय फिल्म जगत में ट्रेजेडी क़ुईन मीना कुमारी के नाम से जाना जाता है | वो जितनी अच्छी अदाकारा थीं उतनी ही अच्छी शायर भी थीं |
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