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Jan 24, 2011

अपने हर हर लफ्ज़ का खुद आइना हो जाऊँगा

अपने हर हर लफ्ज़ का खुद आइना हो जाऊँगा
उस को छोटा कह के मैं कैसे बड़ा हो जाऊँगा

तुम गिराने में लगे थे तुम ने सोचा ही नहीं
मैं गिरा तो मसला बन कर खड़ा हो जाऊँगा

मुझको चलने दो अकेला है अभी मेरा सफ़र
रास्ता रोका गया तो काफ़िला बन जाऊँगा

सारी दुनिया कि नज़र में है मेरा अहेद-ए-वफ़ा
एक तेरे कहने से क्या मैं बेवफ़ा हो जाऊंगा
                                                    ----- वसीम बरेलवी, 

अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है

अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपायें कैसे
तेरी मर्ज़ी की मुताबिक नज़र आयें कैसे

घर सजाने का तसव्वुर तो बहुत बाद का है
पहले ये तय हो कि इस घर को बचाएं कैसे

कह कहा आँख कि बर्ताव बदल देता है
हंसने वाले तुझे आंसू नज़र आयें कैसे

कोई अपनी ही नज़र से तो हमे देखेगा
इक क़तरे को समंदर नज़र आये कैसे
                                              ----- वसीम बरेलवी

आते आते मेरा नाम सा रह गया

आते आते मेरा नाम सा रह गया
उन के होठों पे कुछ काँपता रह गया

वो मेरे सामने ही गया और मैं
रास्ते कि तरह देखता रह गया

झूठ वाले कहीं से कहीं बढ़ गए
और मैं था कि सच बोलता रह गया

आँधियों के इरादे तो अच्छे न थे
ये दिया कैसे जलता हुआ रह गया
                                         ----- वसीम बरेलवी